Wednesday, 27 November 2013

एक पल

प्यार के एक पल ने जन्नत को दिखा दिया,
प्यार के उसी पल ने मुझे ता -उमर रुला दिया,
एक नूर की बूँद की तरह पिया हमने उस पल को,
एक उसी पल ने हमे खुदा के क़रीब ला दिया !!!

बेनाम सा ये दर्द

बेनाम सा ये दर्द, ठहर क्यूँ नही जाता,
जो बीत गया है वो , गुज़र क्यूँ नही जाता,

वो एक ही चेहरा तो नही सारे जहाँ में,
जो दूर है वो दिल से उतर क्यूँ नही जाता,

मैं अपनी ही उलझी हुई राहों का तमाशा,
जाते हैं जिधर सब, मैं उधर क्यूँ नही जाता,

वो नाम है बरसों से, न चेहरा न बदन है,
वो ख्वाब अगर है तो, बिखर क्यूँ नही जाता

Thursday, 30 May 2013

"यादों"



यादों की किम्मत वो क्या जाने,

जो ख़ुद यादों के मिटा दिए करते हैं,

यादों का मतलब तो उनसे पूछो जो,

यादों के सहारे जिया करते हैं…

Friday, 17 May 2013

"एकांत"


एकांत कभी-कभी सर्वाधिक भाता है
सिवा खुद के जब पास कोई नहीं होता
एकांत खुद की पहचान कराता है ।

एकांत कभी-कभी बिल्कुल नहीं भाता
जब पास दूसरी कोई आवाज़ नहीं होती
एकांत जीने की हर चाह को खाता है ।

खतरनाक कैदी को देते सजा एकांत की
जो न डरा,न टूटा,कभी किसी और से
एकांत की मार से वो भी चटक जाता है ।

Thursday, 16 May 2013

बस लिखते हैं "हम" !!


न चाह है कोई न ही कोई अपेक्षा
खुशी के लिये बस लिखते हैं हम
न उन्हें है खबर न उनसे गिला
मिलता क्या सुकूं,जो लिखते हैं हम
घुमड़ता सा मन है,ये चंचल पवन
मंद पुरवाई में बैठ फिर सोचते हैं हम
फैला है विस्तार सा जीवन यहाँ
बस समेट लाने को पिरोते हैं हम
जब भाव खोजते हैं,तब शब्द बोलते हैं
शब्दों के रंगों को भरते हैं हम
लिखने की चाह न छूटे कभी
मन झंझोड़ने को अपना,लिखते हैं हम…


Wednesday, 15 May 2013

पर्यावरण दिवस पर..........


एक कहावत है कि कभी भी बात इतनी नहीं बिगड़ती कि उसे कभी संभाला न जा सके। 'पर्यावरण ' पर भी यही बात लागू होती है । आइये देखें, इसे रोकने के लिए हम-आप क्या कर सकते हैं। पर्यावरण संरक्षण के बारे में पढ़े और साथियों को पढ़ने के लिए प्रेरित करें । इससे आप पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका को समझ सकेंगे । 'इनवॉयरनमेंट क्लब' का गठन इस दिशा में अच्छी पहल साबित हो सकती है। हम जब भी बिजली का इस्तेमाल करते हैं, वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़ती है। बिजली बचाकर आप न केवल ऊर्जा, बल्कि पृथ्वी को भी बचा सकते हो। ईधन चालित व्यक्तिगत वाहनों की जगह कार पूल/बस में सफर को वरीयता देनी चाहिए। छोटी दूरी के लिए पैदल चलने या साइकिल का इस्तेमाल करें । बिजली की जगह सोलर एनर्जी के इस्तेमाल से ग्रीन हाउस प्रभाव को सीमित किया जा सकता है। रोशनी, खाना बनाने और पानी गर्म करने के लिए सोलर एनर्जी प्रोडॅक्ट्स आसानी से उपलब्ध है। अधिक से अधिक मात्रा में वृक्ष लगायें और इनकी देखभाल करें । यही वह भरोसेमंद सिपाही हैं; जो पृथ्वी को बचाने की इस लड़ाई में सच्चे साथी साबित होंगे।

आज ‪पर्यावरण दिवस‬ है ,‎
पेड़ पौधे लगाओ‬ 
और जीवन
बचाओ।‪

Friday, 5 April 2013

देखा है…


मैंने हर रोज जमाने को रंग बदलते देखा है,
उम्र के साथ जिंदगी को ढंग बदलते देखा है .. !!

वो जो चलते थे तो शेर के चलने का होता था गुमान,
उनको भी पाँव उठाने के लिए सहारे को तरसते देखा है !!

जिनकी नजरों की चमक देख सहम जाते थे लोग,
उन्ही नजरों को बरसात की तरह रोते देखा है !!

जिनके हाथों के जरा से इशारे से टूट जाते थे पत्थर,
उन्ही हाथों को पत्तों की तरह थर थर काँपते देखा है !!

जिनकी आवाज़ से कभी बिजली के कड़कने का होता था भरम,
उनके होठों पर भी जबरन चुप्पी का ताला लगा देखा है !!

ये जवानी ,ये ताकत ,ये दौलत सब रब की इनायत है,
इनके रहते हुए भी इंसान को बेजान हुआ देखा है !!

अपने आज पर इतना ना इतराना मेरे यारों ...
वक्त की धारा में अच्छे अच्छों को मजबूर हुआ देखा है .. !!!
कर सको तो किसी को खुश करो दुःख देते तो हजारों को देखा है..!!
            लव यू "पापा"