Thursday, 30 May 2013
Friday, 17 May 2013
"एकांत"
सिवा खुद के
जब पास कोई
नहीं होता
एकांत खुद की
पहचान कराता है
।
एकांत कभी-कभी
बिल्कुल नहीं भाता
जब पास दूसरी
कोई आवाज़ नहीं
होती
एकांत जीने की
हर चाह को
खाता है ।
खतरनाक कैदी को
देते सजा एकांत
की
जो न डरा,न टूटा,कभी किसी
और से
एकांत की मार
से वो भी
चटक जाता है
।
Thursday, 16 May 2013
बस लिखते हैं "हम" !!
न चाह है कोई न ही कोई अपेक्षा
खुशी के लिये बस लिखते हैं हम
न उन्हें है खबर न उनसे गिला
मिलता क्या सुकूं,जो लिखते हैं हम
घुमड़ता सा मन है,ये चंचल पवन
मंद पुरवाई में बैठ फिर सोचते हैं हम
फैला है विस्तार सा जीवन यहाँ
बस समेट लाने को पिरोते हैं हम
जब भाव खोजते हैं,तब शब्द बोलते हैं
शब्दों के रंगों को भरते हैं हम
लिखने की चाह न छूटे कभी
मन झंझोड़ने को अपना,लिखते हैं हम…
Wednesday, 15 May 2013
पर्यावरण दिवस पर..........
एक कहावत है कि
कभी भी बात
इतनी नहीं बिगड़ती
कि उसे कभी
संभाला न जा
सके। 'पर्यावरण ' पर
भी यही बात
लागू होती है
। आइये देखें,
इसे रोकने के
लिए हम-आप
क्या कर सकते
हैं। पर्यावरण संरक्षण
के बारे में
पढ़े और साथियों
को पढ़ने के
लिए प्रेरित करें
। इससे आप
पर्यावरण संरक्षण में अपनी
भूमिका को समझ
सकेंगे । 'इनवॉयरनमेंट
क्लब' का गठन
इस दिशा में
अच्छी पहल साबित
हो सकती है।
हम जब भी
बिजली का इस्तेमाल
करते हैं, वायुमंडल
में ग्रीनहाउस गैसों
की मात्रा बढ़ती
है। बिजली बचाकर
आप न केवल
ऊर्जा, बल्कि पृथ्वी को
भी बचा सकते
हो। ईधन चालित
व्यक्तिगत वाहनों की जगह
कार पूल/बस
में सफर को
वरीयता देनी चाहिए।
छोटी दूरी के
लिए पैदल चलने
या साइकिल का
इस्तेमाल करें ।
बिजली की जगह
सोलर एनर्जी के
इस्तेमाल से ग्रीन
हाउस प्रभाव को
सीमित किया जा
सकता है। रोशनी,
खाना बनाने और
पानी गर्म करने
के लिए सोलर
एनर्जी प्रोडॅक्ट्स आसानी से
उपलब्ध है। अधिक
से अधिक मात्रा
में वृक्ष लगायें
और इनकी देखभाल
करें । यही
वह भरोसेमंद सिपाही
हैं; जो पृथ्वी
को बचाने की
इस लड़ाई में
सच्चे साथी साबित
होंगे।आज पर्यावरण दिवस है ,
पेड़ पौधे लगाओ
और जीवन
बचाओ।
Friday, 5 April 2013
देखा है…
मैंने हर रोज जमाने को रंग बदलते देखा है,
उम्र के साथ जिंदगी को ढंग बदलते देखा है .. !!
वो जो चलते थे तो शेर के चलने का होता था गुमान,
उनको भी पाँव उठाने के लिए सहारे को तरसते देखा है !!
जिनकी नजरों की चमक देख सहम जाते थे लोग,
उन्ही नजरों को बरसात की तरह रोते देखा है !!
जिनके हाथों के जरा से इशारे से टूट जाते थे पत्थर,
उन्ही हाथों को पत्तों की तरह थर थर काँपते देखा है !!
जिनकी आवाज़ से कभी बिजली के कड़कने का होता था भरम,
उनके होठों पर भी जबरन चुप्पी का ताला लगा देखा है !!
ये जवानी ,ये ताकत ,ये दौलत सब रब की इनायत है,
इनके रहते हुए भी इंसान को बेजान हुआ देखा है !!
अपने आज पर इतना ना इतराना मेरे यारों ...
वक्त की धारा में अच्छे अच्छों को मजबूर हुआ देखा है .. !!!
कर सको तो किसी को खुश करो दुःख देते तो हजारों को देखा है..!!
लव यू "पापा"
Sunday, 17 March 2013
इतने अनजान क्यो हो………
न जाने क्यों में तुमसे इतना प्यार करती हुँ
तुमसे हरवक्त मिलने का इंतजार करती हुँ
मेरी चाहतो पर क्यों इतना अनजान हो
झील सी गहरी इन आंखों में कुछ सपने लिए
में तुमसे मिलने का इंतजार करती हुँ
हर आहट पर हमे लगे की वो आ गए
न जाने कब आप हमारे दिल में समा गए
देखते ही देखते आप मेरे इस दिल में
अपनी एक बहुत ही खास जगह बना गए
अहसास अपने प्यार का मुझको दिला गए
मोहब्बत की दुनिया में मुझको भी डुबा गए
न जाने क्या बात है आपको चाहने में
मुझे जैसे पत्थर को मोम जैसा बना गए……
मेरे प्यारे दोस्त तुम्हारे लिये…~~®®®~~
Saturday, 16 June 2012
मेरे पापा आप हो सबसे ख़ास !!!
पापा कभी पसंद नहीं पूछते फिर भी हर पसंद कीचीज़ बिन कहे ही ला देते हैं ,जाने कैसे।
बात करना उन्हें पसंद नहीं चुप ही रहते हैं अक्सर
मन की सारी बातें फिर भी जान जाते हैं मन से
बिन कहे सब कह जाते हैं,जाने कैसे।
पापा कुछ सख्त सी दूरियाँ रखते हैं हमारे साथ
पर किसी और की सख्ती मंज़ूर नहीं उन्हें
अपने इस प्रेम को सख्ती से छुपाते हैं,जाने कैसे।
फर्क नहीं उन्हें हम दूर हों या पास या कि किसके साथ
जबकि फर्क है उन्हें हम कहाँ हैं और हैं किसके साथ
कहते नहीं जताते भी नहीं छुपाते हैं जज़्बात,जाने कैसे।
उठ कर चले जाते हैं जब भी कोई बात होती है भावुक सी
कह देते हैं फ़ालतू बातें करते हो तुम सभी
अपनी भावनाओं को कभी बहने नहीं देते ,जाने कैसे।
पापा का जीवन हूँ मै और मेरा सब कुछ वो
न कभी कहते हैं खुद, न कभी मुझे कहने देते हैं
जब भी कहना चाहूँ बात बदल दते हैं ,जाने कैसे।
पर आज कहतेहैं , न रोक सकेंगे आप मेरी आवाज़
मेरे जज़्बात, मेरे पापा आप हो सबसे ख़ास !!!
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