Thursday, 16 May 2013

बस लिखते हैं "हम" !!


चाह है कोई ही कोई अपेक्षा
खुशी के लिये बस लिखते हैं हम
उन्हें है खबर उनसे गिला
मिलता क्या सुकूं,जो लिखते हैं हम
घुमड़ता सा मन है,ये चंचल पवन
मंद पुरवाई में बैठ फिर सोचते हैं हम
फैला है विस्तार सा जीवन यहाँ
बस समेट लाने को पिरोते हैं हम
जब भाव खोजते हैं,तब शब्द बोलते हैं
शब्दों के रंगों को भरते हैं हम
लिखने की चाह छूटे कभी
मन झंझोड़ने को अपना,लिखते हैं हम


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