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Thursday, 28 May 2015

यारी

जब मिले तुम्हे ये इल्म न था
इतने अज़ीम हो जाओगे
फिर जाओगे दे दर्दे दिल
के भी मुफीद ना आओगे
जो वक़्त गुज़ारा संग तेरे
सब स्वप्न सरीखे लगते हैं
सुख दुःख जो बांटे थे हमने
अब दूर सरकते दिखते हैं
हम दूर बहुत होंगे फिर भी
तुझको ना जाने देंगे दूर
तुम दिल में हमारे बसते हो
साँसों में है यारी का नूर
हँसते ही रहो और सदा सुखी
बस यही कामना मेरी है
हम यही खड़े इंतज़ार में
तेरे बिन यारी ये अधूरी है

Saturday, 15 February 2014

"रिश्तों के बाज़ार"

कदम रुक गए जब पहुंचे हम रिश्तों के बाज़ार में...
बिक रहे थे रिश्ते खुले आम व्यापार में..
कांपते होठों से मैंने पुछा, "क्या भाव है भाई इन रिश्तों का?"
दूकानदार बोला: "कौनसा लोगे..? बेटे का.. या बाप का...? बहिन का...
या भाई का..?
बोलो कौनसा चाहिए..? इंसानियत का. या प्रेम का..?
माँ का.. या विश्वास का..?
बाबूजी कुछ तो बोलो कौनसा चाहिए.
चुपचाप खड़े हो कुछ बोलो तो सही...
मैंने डर कर पुछ लिया दोस्त का..?
दुकानदार नम आँखों से बोला: "संसार इसी रिश्ते पर ही तो टिका है..,
माफ़ करना बाबूजी ये रिश्ता बिकाऊ नहीं है..
इसका कोई मोल नहीं लगा पाओगे, और जिस दिन ये बिक जायेगा...
उस दिन ये संसार उजड़ जायेगा...
"सभी मित्रों को समर्पित..

Thursday, 30 May 2013

"यादों"



यादों की किम्मत वो क्या जाने,

जो ख़ुद यादों के मिटा दिए करते हैं,

यादों का मतलब तो उनसे पूछो जो,

यादों के सहारे जिया करते हैं…