उदासी के इस लंबे दौर में मैनें बना लिये है,मुस्कुराहटो के कुछ ठिकाने..!!
यूं तो न जाने कितनी कहानियॉ हैं इन उदासियों का हिस्सा में, जिसमे एक कहानी तुम्हारी भी तो है....!!
अपने जीवन के सबसे ख़ूबसूरत और मीठे शब्द मैंने तुम्हारे ही नाम किए थे,पर नहीं जानता था कि उसका मूल्य तुम्हारे लिये दो कौड़ी भी नहीं रहेगा! तुम्हे पाने का कभी इरादा न था,लेकिन तुम्हे खो देने के डर से मुझसे जो गलतियां हुई और उनका पूर्ण स्वीकार भी मैं करता हूं पर तुम्हारी माफ़ी नहीं पा सका। जाते-जाते जो शब्दबाण तुमने छोड़े उनसे बहुत कुछ मर चुका था मेरे भीतर। पर मैं नहीं जानता कि वह कौन-सी भावना होती है जो तुमसे लगातार मिले अपमान, तिरस्कार और व्यंगय बाणो के बावजूद खत्म होने का नाम नहीं लेता। कितना कुछ था, जो तुमसे कहना था। क्यों हमारे बीच भ्रम पैदा करने की किसी कि कोशिश को सफल होने दी..?
तुम्हे अहसास भी नहीं कि सारी दुनिया की ईर्ष्या से बचने की कवायद में तुम उससे ही ईर्ष्या कर बैठे, जिसके होंठों पर सदा तुम्हारे लिए दुआएं बसती हैं। जानता हूं प्रेम के उच्चतम तल को मैं नहीं छू पाया, इसलिए ये सारी शिकायतें हैं, ये सारे प्रश्न हैं। पर फिर भी हर रोज़ तुम याद आते हो और मैं खुद को भूल जाता हूं। शायद तुम सिखा रही हो अपेक्षाओं के पर काटना और मैं सीख रहा हूं फिर से प्यार बांटना। लम्हा-लम्हा दर्ज हो रहा है तुम्हारा दिया दर्द मन के किसी कोने में और शायद एक दिन यही सिखाएँगा मुझे सही मायनों में "प्रेम"
Wednesday, 2 August 2017
प्यार..??
मैं प्रेम में था...!!
मैं प्रेम में था और उसे बांधने की कोशिश करने लगा ,मैं उसे जितना खुद से बांध कर रखना चाहता वो मुझसे उतना ही दूर होता चला गया ..... ये मेरी ,उसकी नहीं अधिकतर प्रेम को जीने वाले जोड़ों की कहानी है जब हम प्रेम में होते हैं तो अपने प्रेमी /प्रेमिका को कैद करने की भरपूर कोशिश करते हैं लेकिन उसका प्रतिफल ये होता है कि सामने वाला इंसान हमसे दूर जाने लगता है या बहुत सारी बातों को छुपाने लगता है ,प्रेम मुक्ति का दूसरा नाम है अगर आप प्रेम को जीना चाहते हैं और प्रेम पाना चाहते हैं आज़ाद कर दीजिये अपने जीवनसाथी को ,बार -बार शक करना छोड़ कर उन्हें करने दीजिये हर वो काम जिनमें वे खुश हैं ,उन पर भरोसा करिये क्योंकि प्रेम और भरोसा साथ -साथ चलते हैं अगर भरोसा नहीं है तो प्रेम भी निश्चित तौर पर नहीं है ,,एक बार आज़ाद करके,भरोसा करके देखिये आप का प्रेम और भी गहरा होगा और निश्चित तौर पर आपके प्रेम की आयु औसत से कहीं ज्यादा होगी।।
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Thursday, 14 July 2016
हरवक्त मदद करो....डरो मत.!!
किसी दिन रास्ते से गुज़रते हुए सड़क पर कोई इंसान लाचार अवस्था में खून से लथपथ पड़ा हो, और हम उसके बगल से सिर्फ ये सोचकर गुज़र जाएँ कि कोई और मदद कर देगा, या मुझे इस पछड़े में नही पड़ना, या मेरे पास अभी वक़्त नही, और कुछ देर बाद आपके पास फ़ोन आये कि उसी सड़क पर उसी जगह आपके किसी अपने ने दुर्घटना में दम तोड़ दिया, क्योंकि हॉस्पिटल पहुँचाने में देरी हो गयी, या इलाज़ वक़्त पर नही मिला.
आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि उस वक़्त आप पर क्या बीतेगी, आपका कलेजा किस तरह फट कर बाहर आ जायेगा कि जिस घायल से किनारा करके आप अभी गुज़र गए थे वो आपका ही पिता,भाई,बहन,माँ,चाचा,बेटा था। आप मौत से बदतर ज़िन्दगी जिएंगे, और हर रोज़ पछतावे के हज़ार कड़वे घूंठ पिएंगे कि काश रुक गए होते,मदद कर दी होती, हॉस्पिटल पहुंचा दिया होता या एम्बुलैंस को एक फोन ही कर दिया होता। लेकिन फिर ये सिर्फ काश में लिपटे अफ़सोस होंगे, और कुछ नही।
दरअसल हमारे देश में घायल की मदद करने वाले शख्स को पुलिस और कानून का जो बर्ताव झेलना पड़ता है वो उसे भी नही झेलना पड़ता जिसने वो दुर्घटना को अंजाम दिया होता है। पुलिस की लंबी और तंग कर देने वाली सवाल जवाब और शक करने की प्रक्रिया, फूहड़ रवैया, अपमानजनक ढंग से बर्ताव, और इससे पहले अस्पताल पहुँचाने पर इलाज़ से पहले अस्पताल प्रशासन की लंबी चौड़ी प्रक्रिया। इन सबमे व्यक्ति को इतनी बुरी तरह से शोषित कर दिया जाता है कि मदद के लिए आगे बढे हाथ पछतावे में तब्दील हो जाते हैं।
1.अगर एक व्यक्ति चश्मदीद नही है और वो एक घायल को अस्पताल पहुंचाता है तो उससे कोई सवाल जवाब न किये जाये और उसे तुरंत जाने की अनुमति हो।
2.सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो व्यक्ति पुलिस और आपातकालीन सेवाओं को किसी घायल के सड़क पर पड़े होने की सूचना देगा उसे अपनी पहचान या निजी जानकारी देने के लिए विवश नही किया जायेगा।
4. यदि किसी मामले में घायल को अस्पताल लाने वाला व्यक्ति खुद अपनी इच्छा से पहल करते हुए बताये कि वो दुर्घटना का चश्मदीद है तो उससे सिर्फ एक बार सवाल जवाब किया जाएगा, 60 दिन के भीतर ये सुनिश्चित किया जाए कि मदद करने वाले को पुलिस या अदालत के द्वारा परेशान न किया जाये। बार बार तलब करने की बजाय गवाह को पहली बार की गयी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिये परखा जाए।
5. कोई भी पंजीकृत अस्पताल निजी या सरकारी, घायल को अस्पताल लाने वाले व्यक्ति से पैसों की मांग नही करेगा जब तक वो उसका कोई सागा संबंधी न हो, और घायल को बिना किसी देरी के तुरंत इलाज मुहैया कराया जायेगा।
हर अस्पताल अपने सालाना मुनाफे से कम ऐ कम 2% धन राशि घायलों के मुफ़्त इलाज के लिए नियुक्त करेगा।
6. सड़क दुर्घटना जैसी आपात कालीन वाली स्थिति में यदि कोई भी डॉक्टर जिसके इलाज की मरीज़ को तुरंत आवश्यकता हो यदि देरी करता है तो ये मेडिकल कॉउंसिल ऑफ़ इंडिया 2002, के 7वें अध्याय के "प्रोफेशनल मिस कंडक्ट में माना जायेगा,और अध्याय 8 के तहत उस पर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाये।
8. सभी निजी और सरकारी अस्पताल इन दिशा निर्देशों के जारी होने के 60 दिन के भीतर इन्हें लागू करे, वरना इनके पंजीकरण रद्द किये जाएँ।
Friday, 20 May 2016
दोस्ती क्या है ???
कल किसी ने मुझसे कहा दोस्ती एक उम्र वाले से होता,आप बहुत बड़े हो..!! मैं भी सोच मे पड़ गया और इसका जवाब ढुढ़ने लगा | दोस्ती को ले कर बहुत सारे विद्वानो ने बहुत कुछ लिखे | मैनें भी अपने कुछ दोस्तो से पुछा पलट कर उनसबों का हसँता हुआ मजाकिया जवाब ..क्या यह ही दोस्ती हैं..?
मेरी नज़र में दोस्ती जैसे रिश्ते को कभी शब्दों में ढाल कर व्यक्त नहीं किया जा सकता..यानि कुल मिलाकर दोस्ती रिश्ता एक ,रूप अनेक जैसा लगा.. दोस्ती के इस एक रिश्ते में न जाने कितने रंग छिपे हैं ज़िंदगी के...!! तभी तो है यह दोस्ती है एक प्यार सा बंधन ... फिर भी कुछ लोगों का ऐसा मानना है कि एक लड़का और एक लड़की कभी अच्छे दोस्त नहीं हो सकते ... यदि उनमें दोस्ती है भी तो आगे जाकर उनकी यह दोस्ती प्यार में बदल ही जाती है ......
सच है , प्यार दोस्ती है मगर प्यार का भी तो केवल एक ही रूप नहीं होता ना ... मेरा मतलब यहाँ सिर्फ दोस्ती से है फिर चाहे वो लड़के लड़की हो या लड़कों-लड़कों की हो या फिर दो सहेलियों की, दोस्ती में जो एहसास जो जज़्बात आप महसूस करते हैं वही एहसास कोई अगला व्यक्ति तभी महसूस कर सकता है जब उसने भी अपने जीवन में कोई सच्चा दोस्त बनाया हो , या पाया हो ... क्यूंकि दोस्त वो है जो ज़िंदगी के हर मोड़ पर आपका साथ दे फिर चाहे आप थोड़ा बहुत गलत ही क्यूँ ना हो , वैसे तो दोस्त का काम है आपका सही मार्ग दर्शन करना ......
दोस्ती या दोस्त एक ऐसा शब्द जिसके ज़हन में आते ही आपके होंठों पर स्वतः ही एक मधुर मुस्कान आ जाती है ... शायद इसलिए दुनिया में दोस्ती से अच्छा और सच्चा दूजा कोई रिश्ता नहीं क्यूंकि बाकी रिश्ते तो हमें विरासत में मिलते हैं मगर दोस्त हम खुद चुनते है | वैसे यह बात काफी घिसी पिटी सी लगती है ... मगर सच तो यही है और मुझे यह रिश्ता बहुत पसंद है क्यूंकि इसमें कोई भेद-भाव नहीं होता ... अगर कुछ होता है तो वो है सिर्फ दोस्ती आपसी समझ जो एक सच्चे और अच्छे दोस्त की सबसे पहली निशानी होती है और सबसे अहम बात तो यह होती है कि दोस्ती वो रिश्ता है जिसे कभी जबरदस्ती नहीं निभाया जा सकता ... खैर अच्छे दोस्त तो फिर भी बहुत आसानी से मिल जाते है इस दुनिया में , मगर सच्चा दोस्त बहुत ही किस्मत वालों को बड़े नसीब से मिल पाता है ... दोस्त इसलिए कहा क्यूंकि सच्चा दोस्त केवल एक ही व्यक्ति हो सकता है क्यूंकि दोस्तों के समूह के नाम पर भले ही आपके गिने चुने दोस्त हों मगर उन सब में से भी कोई एक ऐसा ज़रूर होता है जिसे आप बाकी सभी दोस्तों की तुलना में अपने आप से ज्यादा करीब महसूस करते है .......
सच ही कहते हैं लोग आदमी नाते रिश्तेदारों के बिना एक बार ज़िंदा रह सकता है मगर दोस्तों के बिना नहीं ... दोस्तों की ज़रूरत तो हर कदम पर पड़ती है,...हाँ ..!! यह बात अलग है कि कुछ दिल के करीब होते हैं तो कुछ सिर्फ कहने के लिए ... मगर हमारी ज़िंदगी में आने वाला हर इंसान हमें कुछ न कुछ ज़रूर सिखा जाता है इसलिए दुनिया के सभी दोस्तों को और दोस्ती के इस पावन रिश्ते को मेरा सलाम ...…🙏🙏~~®®®~~
Friday, 5 February 2016
जिंदगी का एक पन्ना और "मेरी पसंद"
"जी हाँ", अंदाज़ा लगा चुके होंगे आप सब कि मैं एक रेलगाड़ी पर था। 2015 के अगस्त महीना मे मुझे परीक्षा के लिये पटना से मम्बई से कटक जाना पड़ा.. नाशिक कुम्भ मेला ओर परीक्षार्थी के कारण टिकट की मारा मारी में मुझे अपने गंतव्य स्थान के लिये आर•ए•सी का ही टिकट मिल सका। सुबह के 10 बजे रहे थे,ट्रेन नागपुर मे पहुची ही थी,आगे के सफर को पुरा करने के लिए मैंने एक मैगज़ीन ख़रीदी और धुप का मज़ा लेते हुये चाय की चुस्कियाँ के साथ उसे पढ़ने लगा।Sunday, 3 January 2016
माँ..
वो मेरी ख़ुशी में
खिलखिलाती है..
वो मेरे ग़म में,
आंसू बहाती है..
टूटने लगु किसी बात पर
वो हौसला बढ़ाती है...
भटक जाऊं अगर राह छोड़कर
वो रास्ता दिखाती है...
वो जान भी ले अगर मैं गलत हूँ इसबार,
वो मेरी अच्छी बाते सबको बताती हैं
वो खुदा है मेरी,वो भगवान है मेरी
उसे मेरी कोई गलती नज़र नही आती है,
किसी रोज़ बस एक निवाला कम खा लूँ तो,
वो ज़िद में छोटी बच्ची बन जाती है,
वो मानती है उसकी दुनिया हूँ मैं,
पर माँ..
तुझमे मुझे अपनी पूरी दुनिया नज़र आती है...

