Thursday, 9 April 2015

Is that okay with you?...


अभी बदला नही हूँ मैं....

मुश्किलें जरुर है मगर ठहरा नही हूँ मैं.
मंज़िल से जरा कह दो अभी पहुंचा नही हूँ मैं.

कदमो को बाँध न पाएंगी मुसीबत कि जंजीरें,
रास्तों से जरा कह दो अभी भटका नही हूँ मैं.

सब्र का बाँध टूटेगा तो फ़ना कर के रख दूंगा,
दुश्मन से जरा कह दो अभी गरजा नही हूँ मैं.

दिल में छुपा के रखी है लड़कपन कि चाहतें,
दोस्तों से जरा कह दो अभी बदला नही हूँ मैं.

साथ चलता है, दुआओ का काफिला,
किस्मत से जरा कह दो अभी तनहा नही हूँ मैं.


Wednesday, 8 April 2015

जीवन होगा हर्ष भरा.....




सूरज है निस्तेज पड़ा
बादल इसके पास खड़ा,
अपने पथ पर बढ़ता सूरज
ना है कोई मद भरा.

दुःख हैं थोड़े बादल जैसे
छंट जायेंगे गम न कर,
अड़ियल बादल हट जाएंगे
दिन निकलेगा धूप भरा.

मत घबराना थोड़े दुःख से
जीवन होगा हर्ष भरा.

Friday, 27 March 2015

भारत रत्न : अटल बिहारी वाजपेयी……




"भारत रत्न : अटल बिहारी वाजपेयी" _/\_
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बाधाएँ आती हैं आएँ
घिरें प्रलय की घोर घटाएँ,
पावों के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ,
निज हाथों में हँसते-हँसते,
आग लगाकर जलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।

हास्य-रूदन में, तूफ़ानों में,
अगर असंख्यक बलिदानों में,
उद्यानों में, वीरानों में,
अपमानों में, सम्मानों में,
उन्नत मस्तक, उभरा सीना,
पीड़ाओं में पलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।

उजियारे में, अंधकार में,
कल कहार में, बीच धार में,
घोर घृणा में, पूत प्यार में,
क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में,
जीवन के शत-शत आकर्षक,
अरमानों को ढलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।

सम्मुख फैला अगर ध्येय पथ,
प्रगति चिरंतन कैसा इति अब,
सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ,
असफल, सफल समान मनोरथ,
सब कुछ देकर कुछ न मांगते,
पावस बनकर ढ़लना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।

कुछ काँटों से सज्जित जीवन,
प्रखर प्यार से वंचित यौवन,
नीरवता से मुखरित मधुबन,
परहित अर्पित अपना तन-मन,
जीवन को शत-शत आहुति में,
जलना होगा, गलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।

Friday, 20 March 2015

The reason is you...

From that wonderfully brilliant song ....

I'm sorry that I hurt you
It's something I must live with everyday
And all the pain I put you through
I wish that I could take it all away
And be the one who catches all your tears
Thats why I need you to hear

I've found a reason for me
To change who I used to be
A reason to start over new
and the reason is You
                                        unknown


i am confused....


I want more hair on my head but I do not want any facial hair
I want to live at my home and yet I want to be alone
I want roads to be empty and still be able to make people jealous
I want to get settled and yet I don’t want to commit
I want more money than I can ever spend and yet more time to do things
I want followers and yet I want to be left alone
I want to live on a mountain and yet not far from the beach
I want to have more wants and cant really think of more
I am confused and yet I am so clear... 
                                                   


Thursday, 19 March 2015

जागरूक बने……


फिर से आपको बहुत बहुत शुक्रिया……