Saturday, 15 February 2014

"कभी - कभी ये ख्याल आता है "

मुझे कभी - कभी ये ख्याल आता है ,
की शायद कोई है जिसे मुझपर भी प्यार आता है,
मेरा हर ग़म उस को लगता है अपना,
और मेरी हर ख़ुशी पे उस को करार आता है,
फिर जाने क्यूँ वो कहने से डरती है,
ऐसा जाने क्या उस के मन में ख्याल आता है,
आँखों से अक्सर इकरार करती है,
क्यूँ होंठों पर हर बार इनकार आता है,
सोचता हूँ मैं ही कह दूं वो जो कह न सकी,
लेकिन फिर न सुन कर बिछरने का ख्याल आता है,
चलो अच्छा है हँसते हँसते ही हम चले जायेंगे,
की शायद कोई है जिसे मुझपर भी प्यार आता है ...

Friday, 14 February 2014

निरंतर चलता हैं प्रेम...

नहीं रुकता प्रेम
कभी भी
नहीं …
कभी थमता भी नहीं
कि बिना संवाद के भी
जारी है
निरंतर संवाद !
मौन की भाषा
पढ़ती हैं आँखें
मौन के संवाद
बोलती हैं आँखें
और सुनता है ह्रदय
मौन की गूँज को
कि नहीं रुकता प्रेम
कभी भी
नहीं…
कभी थमता भी नहीं ….!

Sunday, 26 January 2014

गणतंत्र दिवस यानी भारत का घोषित राष्ट्रीय पर्व।

26 जनवरी आ गई है। गणतंत्र दिवस यानी भारत का घोषित राष्ट्रीय पर्व। बड़े धूम-धाम से राजपथ पर झांकियां निकलेंगी। राज्य और मंत्रालय अपनी-अपनी झांकियां पेश करेंगे। भारत की उपलब्धियांताकत और सौंदर्य एक साथ दिखेगा। पूरा दिन टीवी चैनल पर यह सब दिखेगा और अगले दिन अखबार भी इन्हीं की फोटो से भरे रहेंगे।

दो दिन पहले इंडिया गेट के पास से गुजरा तो गणतंत्र दिवस के समारोह के टिकट का रेट लगा देखा। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक उत्सव के टिकट कई रेट में बिक रहे हैं। यह टिकट किसके लिए बिक रहे हैं?नेताओं और बड़े अफसरों को इस समारोह का निमंत्रण मिला होगा। बड़ी संख्या में वीआईपी पास और सामान्य पास जारी हुए होंगेजिन्हें लोग अपनी-अपनी हैसियत के मुताबिक जुगाड़ लगा कर पा सकते हैं।
तो बचे वे लोग जो न नेता हैंन बड़े अफसर हैं और न ही पास का जुगाड़ कर सकते हैंजो इस देश के सही मायनों में आम नागरिक हैं। देश के इन आम नागरिकों को अगर अपने देश के गणतंत्र का उत्सव देखना हो तो उन्हें सैकड़ों रुपए के टिकट खरीद कर जाना होगा। मैं कतई नहीं समझ पा रहा हूं कि गणतंत्र उत्सव के टिकट बेचने का क्या उद्देश्य हैक्या यह कोई कमर्शियल शो हैया  सरकार इन टिकटों को बेचकर गणतंत्र उत्सव पर हुए खर्च की भरपाई करना चाहती हैकुछ भी हो लेकिन एक बात साफ है कि सरकार की मंशा में यही है कि इस उत्सव को देखने वही लोग आएं जो या तो वीआईपी हैं या पास का जुगाड़ कर सकते हैं या फिर जो पैसे खर्च करके टिकट खरीदने की कूवत रखते हैं।

टिकट के रेट भी अलग-अलग हैं। परेड के टिकट 300, 150, 50 और 10 रुपए में मिल रहे हैं। इसमें से 300 रुपए का टिकट लेकर आप सलामी मंच के करीब बैठ सकते हैं। 150 का लेंगे तो थोड़ा पीछे जगह मिलेगी। 50 रुपए का टिकट लिए तो उसके पीछे और 10 का ही ले पाए तो सबसे पीछे। पता नहीं वहां से कुछ दिखेगा भी या नहीं। यानी जो ज्यादा पैसे खर्च कर सकेंउन्हें गणतंत्र का तमाशा नजदीक से देखने का मौका मिलेगा। और जो कम पैसे खर्च कर सकेंउन्हें दूर से ही झलक देखने को मिलेगी। पता नहीं उन्हें बैठने के लिए भी कुछ मिलेगा या नहीं।

गणतंत्र दिवस के मायनेगांवों की तो छोड़ दीजिएशहरों में भी बहुत से लोग आज भी नहीं समझते हैं। सिवाय इसके कि कामकाजी लोगों के लिए यह एक छुट्टी का दिन होता हैजिसे रविवार को नहीं पड़ना चाहिए। और बच्चों के लिए ऐसी छुट्टी जिसमें क्लास नहीं चलती हैं लेकिन स्कूल जाना पड़ता है और कुछ भाषणों के बाद मिठाई मिलती है। इस पर भी लोगों को इससे जोड़ने की सरकार की मामूली सी भी मंशा नहीं दिखती है। 26 जनवरी को लागू संविधान की उद्देशिका की शुरुआत हीहमभारत के लोग...’ से होती है लेकिन इसमें से लोग’ गायब होता जा रहा है।

अतिथि देवो भव: वाले देश में गणतंत्र दिवस पर किसी अन्य देश के राष्ट्राध्यक्ष को बुलाने की पुरानी और बहुत अच्छी परंपरा रही है। किसी अन्य देश के राष्ट्राध्यक्ष को भारत के गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में बुला कर हम अपने लोकतंत्र में सहभागिता को और बढ़ाते हैं। लेकिन यह ऐसी सहभागिता है जिसमें भारत के आम नागरिक के लिए ही कोई जगह नहीं है। ऐसे गणतंत्र दिवस पर अगर मुझे खुशी नहीं होती है तो क्या अचरज!
                                                   -अमित चौधरी 

Friday, 24 January 2014

ये कविता नहीं ये कहानी हैं !!

मैं शराब नहीं पीता,
पर तेरी निगाहें नीयत ख़राब करती हैं !
मैं ख्वाब नहीं देखता,
पर तेरी सूरत नींदे ख़राब करती हैं !!

मैं कोई राज़ नहीं रखता,
पर तेरा ख्याल दिल में दबा रखा हैं !
मैं कोई कामकाज नहीं करता,
पर तेरी आशिकी में खुद को लगा रखा हैं !!

मैं होश नहीं खोता,
पर तेरी चाहत दिन में रात दिखाती हैं !
मैं रोज़ रोज़ नहीं रोता,
पर तेरी याद आँसुओं की बरसात कराती हैं !!

मैं वादों पर नहीं मरता,
पर तेरी कसम हर कसम पे भारी हैं !
मैं सौदेबाजी नहीं करता,
पर तेरे लिए खुदा से जंग जारी हैं !!

मैं मुसाफिर नहीं बनता,
पर तेरी राहों में अपनी ज़िन्दगी बितानी हैं !
मैं काफ़िर नहीं बनता,
पर तेरी मोहब्बत ही बस खुदा की निशानी हैं !!

मैं शायरी नहीं करता,
पर तेरी तारीफ सबको सुनानी हैं !
मैं तस्वीरे नहीं बनाता,
पर तेरी शकल सबको दिखानी हैं !!

मैं झूठ नहीं कहता,
पर मुझे ये बात बतानी हैं !
ये कविता जरूर सुन लो,
पर ये कविता नहीं ये कहानी हैं !!

कहानी हैं ये,
पर इस कहानी में ना कोई रानी हैं !
राजा हूँ मैं,
और रानी की तलाश जारी हैं !!

Tuesday, 31 December 2013

बलात्कार रोकने के लिए जरुरी हैं- नैतिक मूल्य और कठोर क़ानून




आजकल हम सभी रेप जैसी घटनाओ से बहुत अच्छे से वाकिफ है क्यूँकि गूगल के आंकणो के अनुसार भारत में प्रति 26 मिनट में रेप कि कोई न कोई वारदात अवश्य दर्ज होती है। वस्तुतः रेप की वारदातें विश्व के लगभग सभी देशो में होती है पर हमें यह नहीं भूलना चाहिये कि हम उस देश के रहने वाले है जहाँ पर नैतिक मूल्यो को बहुत महत्व दिया जाता है जहां पर स्त्रियों को बहुत उच्च स्थान प्राप्त है,गाँव हो या शहर आजकल महिलायें अपने आप को सुरक्षित नही महसूस करती है।


आये दिन टीवी,अखवार आदि में आपको रेप की खबरे मिलती है,और ऐसा नहीं है कि अपराधी पकड़े न जाते हो पर उनको उस इलाके का कोई नेता,गुण्डा या दादा बचा ही लेता है और यह बहुत बड़ी बिडम्बना है कि हमारे देश में इसके खिलाफ कोई कठोर कानून नहीं है और इसे मैं संविधान की असफलता ही मानता हूँ। जहाँ पर एेसे जघन्य कर्म करने वालो को कठोर से कठोर सजा होनी चाहिये वही हमारे देश के उच्च शिक्षित वकील उनका बचाव करते दिखते है और इस दलील के बाद कि रेप करने वाला नाबालिग है मेरा इन्सानियत से भरोसा ही उठ जाता है।

रेप पर हमारे धरतीबोझ नेता जी का दिया हुआ बयान तो याद ही होगा कि लड़को से गलतियाँ हो जाती हैं।हमारे देश के लिबरल्स जो कि रेप के कारण गिनाते घूमते है कि रेप छोटे कपड़ो की वजह से होता है,लड़कियाँ रात को निकलती ही क्यूँ है आदि आदि पर मेरे हिसाब से रेप की घटनाऐं केवल तुच्छ मानसिकता और इसके खिलाफ कोई कठोर कानून न होने की वजह से होती है मुझे लगता है कि कोई व्यक्ति जिसकी मानसिकता थोड़ी सी भी अच्छी है वह व्यक्ति रेप जैसी घटनाओं को अन्जाम नहीं दे सकता है।

हमें चाहिये कि हम अपने आगे आने वाली जेनरेशन को अपने नैतिक मूल्य स्थानांतरित करें और मोदी सरकार जो कि पूर्ण बहुमत के साथ केन्द्र में है उससे उम्मीद करतें है कि रेप जैसे अपराधो के खिलाफ कोई कठोर कानून लायेगी और उस कानून के प्रभावी परिणाम होगें तो गाँव हो या शहर हमारे देश की महिलायें अपने आपको पूर्ण सुरक्षित महसूस करते हुये अपने घरो से निकल पायेंगी

Saturday, 28 December 2013

२०१३ की खट्टी-खट्टी यादें ॥

अबे…. 2013 !!
तेरे जैसा साल न आये दोबारा।
तूने तो सारा देश ही निपटा मारा।
सबसे पहले तो छीना राजेश खन्ना
यानि पहले सुपरस्टार को ।
फिर लगते रहे एक के बाद एक घाव,
मुम्बई में विलासराव।
उसके बाद ए के हंगल,
फिर बेस्ट डायरेक्टर यश अंकल।
मन करता था बीच में ही कर दें तुझसे कट्टी,
तब तक रोड़ एक्सीडेंट में मारे गए कॉमेडी किंग जसपाल भट्टी।
फिर तेरी भेंट चढ़ा बाल ठाकरे जैसा लाल,
फिर इंद्र कुमार गुजराल।
तू साले साल था, या काल!
दिसम्बर में भी तूने छोड़ा नहीं अपना गुर,
छीन लिये पंडित रविशंकर ग़ायब हो गये सितार से सुर।
फिर भी तेरा मन नहीं डोला,
हम सबो से दुर कर दिया मन्ना डे और मंडेला।
इतने पर भी भरा नहीं तेरा कोष,
दिल्ली में वहशियों की भेंट चढ़ गई
एक तेईस साल की निर्दोष।
इसके अलावा भी कुछ अच्छा नहीं रहा तेरा बीहेव,
तूने ही लील लिये  भगवान का घर
और आस्था के जय गुरुदेव।
जो तुझसे बचे उनकी भी हालत अच्छी नहीं है भाई,
राम जाने कैसे होगी इसकी भरपाई
सचिन ने क्रिकेट में जाना छोड़ दिया,
लता मंगेशकर ने गाना छोड़ दिया,
रतन टाटा ने कमाना छोड़ दिया,
अन्ना ने आवाज़ उठाना छोड़ दिया,
और सातवें सिलैण्डर ने रसोई में आना छोड़ दिया।
वाह रे काले कालखण्ड,
इतिहास निर्धारित करेगा तेरा दण्ड.
तुने तो मुझे भी नहीं छोरा,
दिया मुझें ऐसा दर्द जिसको भुलना हैं मुश्किल।
अच्छा हुआ तू बीत गया,
तुझे अंदाज़ा नहीं है कि तेरे रहते कितना कुछ रीत गया !!
काश ऐसा साल फिर कभी जीवन में न आए!
जाते जाते तू हम से ले ले फ़ाइनल गुड बाय !!
"नए साल की शुभकामनाएं" ~~®®®~~

Saturday, 14 December 2013

ज़िन्दगी के खेल

ज़िन्दगी के खेल भी अजीब हैं
एक अजनबी को दिल के करीब ला दिया
कल तक जिसका नाम भी जेहन में न था
आज खुदा ने उससे हमारी तकदीर बना दिया
कुछ पल के साथ में ही
वो अपना सा लगने लगा
खुद से थे अनजान अब तक
वो हमे हमी से ज्यादा समझने लगा
कल तक तो ख्वाब में था चेहरा
वो हकीक़त बन सामने आ गया
हो गए हम ख़ास आज किसी के लिए
हमे मिटटी से सोना बना दिया
बस एक गुजारिश है खुदा से अब
के साथ उनका नसीब हो ज़िन्दगी भर
मेरे प्यार पर हो बस उनका ही हक
ये आंखे भी बंद हो तो उनका चेहरा देखकर....